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राम जाने ,कब होगा ,गांधी के सपनो का भारत .
एक नहीं, कई बार पढ़ने को मिला कि गांधीजी ने आजादी के बाद हमेंशा इस बात क़ी वकालत क़ी कि देश के विकास के लिए जो भी नीतियाँ बनाईं जाएँ उसमें समाज के अन्तिम व्यक्ति का चेहरा सामने हो.आज में उस चेहरे को तो ,सामने साक्षात खड़ा देख रहा था,पर ये चेहरा गांधीजी को तलाश रहा था,काश बापू तेरी बातों पर अमल होता, तो ये चेहरा इतना बेबश नॅ होता. इंजीनियरिंग क़ी होनहार छात्रा,ई & सी फ़ोर्थ सेमेस्टर में टॉप टेन में जगह बनाने के बाद, उसकी पढ़ाई इसलिए अवरूध हो गयी कि वह निजि इंजीनियरिंग कालेज के पंचम सेमेस्टर क़ी फिश देने में अक्षम थी.मा-बाप दोनो क़ी लंबी बीमारी ने घर क़ी आर्थिक स्थिति इतनी माली हो गयी कि पढ़ाई क़ी फिश तो दूर् घर में दो जून क़ी रोटी भी मय्यसर भी नहीं हो रही थी.हमने दोस्तों के साथ मिलर कर जब उसकी फिश का बंदोबस्त किया और चेक उसके हाथों में थमाया तो वह भावशून्य हो गयी. बहुत झिझकते हुए उसने कहा सर में जीवन में इस सहयोग को कभी नहीं भूल पाँऊ गी और आपके पैसे भी लौटा दूँगी.हमने उससे कहा अवश्य लौटना लेकिन हमें नहीं, तुम्हारे जैसा कोई होनहार ऐसी दुविधा के भवर में फस जाय उसे.
में एक ऐसी होनहार छात्रा का उल्लेख यंहा सिर्फ इसलिए कर रहा हूँ कि बढ़चढ़ कर आजकल ,बॅंक लौन से उच्च शिक्षा का जो दावा किया जा रहा है,वह आम आदमी के लिए बिल्कुल भी नहीं है.इस छात्रा जैसे कितने ही ऐसी प्रतिभाएं ,आज हमारे देश में हैं ,जो अभावो के बीच दम तोड़ रहीं हैं उँचाई छुने के पहले ही.राम जाने ,कब होगा ,गांधी के सपनो का भारत . फिर भी अगर ईश्वर ने ,अगर आप को सक्षम बनाया है तो आएँ हम स्वयं दीप से दीप जलाएँ. ......
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