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Sunday 20 July, 2008
 15:28 | 24/Apr/2008 |  6 Comment(s)
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सिंधु घाटी के तट से राष्ट्रीयतì 6; के नाम

जीवन में कुछ अनुभव,कुछ लम्हे और कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जो स्मृतियों के खजाने में खास जगह रखते हैं.ऐसा ही , ये अवसर था,हम उस सिंधु नदी के तट पर खड़े थे जिसके साये में हमारी पुरखों की विरासत बिखरी पड़ी है, सिंधु घाटी की सभ्यता के नाम से. लेह के सिंधु घाट पर अलग- अलग गुंपाओ [बौध्य धर्म के सन्यासी स्थल ] से आए लामा, मंत्रोचारण के साथ महानदी [छ.ग.]से लाया जल ,सिन्धुनदी के जल में अर्पित कर रहे थे. ये हमारे लिए सुखद अनुभव था, उस यात्रा का जो हमने ''राष्ट्रीय एकता/ अखंडता और सदभावना'' के नाम से शुरू की थी, 21 साथियों के साथ रायपुर [छ.ग.] से. यात्रा का एक च्छोटा सा उद्देश्य हमने रखा था कि छ्तिसगद के जंगलों मे नक्सलाइट और कश्मीर की वादियो में आतंकवादी मानवीयता को चुनौती दे रहे है ,तो क्यो ना हम भी हमारी महान संस्कृति का संदेश को बुलद करे.जिसमे सिर्फ और सिर्फ मानवीय भाईचारा का संदेश पग-पग पर है.जिसका ज्वलंत उदाहरण है बौध्य धर्म, जो आज लद्धख में फल फूल रहा है ,वही कभी छत्तिस्गद क़ी महानदी के सिरपुर में अपने विकास क़ी चरम स्थिति में था. इस हेतु हमने प्रतीकात्मक रूप से महानदी के जल को चुना. हमारी यात्रा 27 अगस्त को शुरू हुई और लद्धख महोत्सवा के दिन 1 सितांबेर को उसका समापन हुआ . यात्रा का समापन इतना शानदार होगा, यह तो हमारी कल्पना में भी नही था.सिंधु घाट पर ,एक साथ इतने सारे पूजनीय वरिष्ट लमओ का आना ,लद्धख हिल कौंसिल के मुखिया का साथ होना और लेह से हमे जम्मू व कश्मीर के सी.म.क़ी और से रवानगी सचमुच हमे
कायल कर रही थी.खासकर पूजनीय लमओ का जो वीतरागी हैं, उनका बड़ी संख्या में हमारे कार्यकर्म में पहुँचना, किसी आश्चर्य से कम
हमारे लिए नहीं था . हमारी यात्रा क़ी शुरूवात भी, पूजनीय संत पवन दीवान और 11 बॅट्यूको के मंत्रोचरण के साथ हुई. जिसे रायपुर से रवानगी दी ,छ.ग.के सी.म. ने.,कुल मिलाकर हमे लगा क़ी संतो ने ढीक ही कहा है कि 'अगर उद्देश्य पवित्रा हो, तो सारी बाधाएं कट जाती हैं .वरना ,हमारे जैसे साधारण लोगो के लिए ,यह संभव ही नहीं था कि इस यात्रा में एक साथ ,इतनी बड़ी विभूतियो क़ी
शिरकत हो पाती . मैं कई बार शायद लद्दाख और जा सकता हू .पर , क्या पूजनीय लमऊ का सिंधु घाटी पर ये सनिध्ज्य मिलेगा / क्या एक उद्देश्य के साथ ,इतने सारे साथियो को एकत्रित कर सकूँगा ,शायद नही ? जीवन के सँस्मरनू के खजाने मे ये एक अनोखा संग्र्ह है ,यह यात्रा मेरे लिए .

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