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हम पीछे क्यों हैं?
युवा उर्जा का रूप है .साइंस के अनुसार उर्जा कभी नष्ट नही होती ,उसका सिर्फ रूपांतरण होता है .ये अब हम पर निर्भर करता है कि हम इसका किस रूप मे उपयोग करते है. निगेटिव या पाजिटिव जो भी करेंगे उसका उसी रूप में रूपांतरण होता रहेगा. इस रूपांतरण में हमारी मानसिकता ही अहम भूमिका निभाती है. जिसका स्थायी प्रभाव सामाजिक परिवेश पर पड़ता है. महाराष्ट्र की घटनाओ को लें तो एक बात साफ दिखती है कि जो कुछ युवा शक्ति ने किया वह नकारात्मक उर्जा का रूप है. एक सिरफिरे ने महाराष्ट्र के महान नायको की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को जिसमे छत्रपति शिवाजी, तिलक, सावरकर, बाबा आमटे जैसे राष्टीय एकता का संदेश देने वाले महानायक हैं. इनके त्याग को समझे बिना महाराष्ट्रियऩ के हितों को संकीर्ण दायरे मे बांधने की कोशिश की, जो वास्तव मे महाराष्ट्र के हितो की नही अपितु अपनी टुच्चा और तुच्छ राजनीति के बल पर, अपने को स्थापित करने की कोशिश है. यह कोशिश उर्जा का नकारात्मक और भयावह रूप है. हम युवाओ की कोशिश होनी चाहिए कि जब ऐसे नकारात्मक विचार वाले व्यक्ति एक होकर समाज को चुनौती दे रहे हैं तो क्या सकारात्मक विचार वाले सब एक होकर इनके विरुद्ध क्यों न खड़े हों ? आखिर भगवान कृष्ण को भी भगवान होते हुए भी पूतना,कंस,कालीनाग, शिशुपाल जैसी सामाजिक बुराइयों के प्रतीकों को खतम करने के लिए स्वयं को सामने लाना पड़ा था. तो हम पीछे क्यों हैं?
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